IPL 2018: DRS जो 10 साल में नहीं हुआ अब हो गया

No Comments 130 Views

IPL 2018: DRS जो 10 साल में नहीं हुआ अब हो गया

वर्ष 2008 में शुरू हुए आईपीएल में पहली बार ऐसा होगा जो पिछले 10 वर्षो में नहीं देखा गया। दरअसल आईपीएल के 11वें सीजन में डीआरएस का इस्तेमाल होना तय हो गया है। आईपीएल अध्यक्ष राजीव शुक्ला ने बुधवार को बताया, ‘इस पर काफी समय से विचार किया जा रहा था लेकिन अब इसे स्वीकार कर लिया गया है।’ बता दे इस तकनीक की मदद से दोनों में से कोई भी टीम अंपायर के आउट देने या नहीं देने के फैसले को चैलेंज कर सकेंगी।

यह भी पढ़े: IPL 2018: मोहाली से लेकर इंदौर तक, किंग्स इलेवन पंजाब के खेल में हुए इतने बदलाव

DRS (डिसीजन रिव्यू सिस्टम) का इस्तेमाल इस सीजन के उद्घाटन मुकाबले सात अप्रैल को वानखेड़े स्टेडियम में मौजूदा चैम्पियन मुम्बई इंडियंस और चेन्नई सुपर किंग्स के बीच देखा जाएगा। उद्घाटन कार्यक्रम 7 अप्रैल को मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में है और उसी दिन पहला मैच भी खेला जाना है। बता दे आईपीएल का उद्घाटन समारोह पहले 6 अप्रैल को होना था लेकिन बाद में इसकी तारीख बदलकर 7 अप्रैल की गई।

(DRS) डिसीजन रिव्यू सिस्टम का नियम

डिसीजन रिव्यू सिस्टम में टीम का कोई भी खिलाडी अंपायर को आउट या नॉट आउट के लिए रैफर करता हैं। जिसके बाद मैदानी अंपायर थर्ड अंपायर को इसकी पुष्टि के लिए रैफर करके वर्चुअल बॉल ट्रैकिंग टेक्निक के उपयोग की मांग करता हैं। जिसके बाद थर्ड अंपायर तय करता है कि बल्लेबाज आउट है या नहीं। थर्ड अंपायर के अंतिम निर्णय के बाद मैदानी अंपायर इसको सबके सामने लागू करते हैं।

पहली बार (DRS) का इस्तेमाल

आईपीएल अध्यक्ष राजीव शुक्ला की माने तो इस (DRS) का इस्तेमाल आईपीएल सीजन-11 में पहली बार देखने को मिलेगा। सभी के लिए यह आईपीएल बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण हैं। इसमें खिलाड़ियों की कोशिश रहती हैं की वह अच्छा प्रदर्शन करके अपनी टीम को मजबूती प्रदान करें। जिससे उनकी टीम शीर्ष-4 में पहुंचने में सफलता हासिल कर सके।

Tags:  
No Comments

Reader Interactions